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खून से फैलता है हेपेटाइटिस सी, सावधानी ही बचाव : डॉ. अजय
: हेपेटाइटिस सी बीमारी खून के दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ फैलती है। मà¥à¤–à¥à¤¯ कारण à¤à¥‹à¤²à¤¾à¤›à¤¾à¤ª डाकà¥à¤Ÿà¤°à¥‹à¤‚ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ à¤à¤• सीरीज कई मरीजों को लगाने, नशा करने वाले दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— की सीरींज का दूसरे वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² करने, नाई की दà¥à¤•ान पर पर à¤à¤• ही फिटकरी कई लोगों को लगाने से, काला पीलिया के मरीजों का
नेल कटर, टूथ बà¥à¤°à¥à¤¶, शे¨वग बà¥à¤°à¥à¤¶ का आम लोगों दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² करने, टेटू बनवाने वाली जगह पर à¤à¤• ही पिन का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² करने से फैलता है। यह बीमारी पानी से, हाथ मिलाने व साथ खाने-पीने से नहीं फैलती है। यह जानकारी दैनिक जागरण कारà¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ में आयोजित हेलो जागरण कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤® में सिविल असà¥à¤ªà¤¤à¤¾à¤² के हेपेटाइटिस सà¥à¤ªà¥‡à¤¶à¤²à¤¿à¤¸à¥à¤Ÿ à¤à¤µà¤‚ फीजिशियन डॉ.अजय चà¥à¤˜ पाठकों को दे रहे थे। दैनिक जागरण कारà¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ में विशà¥à¤µ हेपेटाइटिस डे के उपलकà¥à¤· में हेलो जागरण कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤® आयोजित किया गया था। कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤® में जिला फतेहाबाद समेत अंबाला, कैथल व सिरसा के मरीजों ने à¤à¥€ बीमारी से संबंधित जानकारी ली। इस दौरान फारà¥à¤®à¤¾à¤¸à¤¿à¤¸à¥à¤Ÿ संदीप कà¥à¤®à¤¾à¤° à¤à¥€ मौजूद रहे। डॉ.चà¥à¤˜ ने पाठकों को जानकारी देते हà¥à¤ कहा कि सेकà¥à¤¸ के माधà¥à¤¯à¤® से हेपेटाइटिस सी का टà¥à¤°à¤¾à¤‚समिशन कम पाया गया है। हेपेटाइटिस बी के अंदर सेकà¥à¤¸ के माधà¥à¤¯à¤® से टà¥à¤°à¤¾à¤‚समिशन जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ है।
50 फीसदी केस में शà¥à¤°à¥‚ में लकà¥à¤·à¤£ नहीं आते और अनà¥à¤¯ केसों में टांगों में दरà¥à¤¦, शरीर में थकावट और लीवर à¤à¤¨à¤œà¤¾à¤‡à¤® बढ़े हà¥à¤ मिलते हैं। 20 फीसदी केस में लीवर सरोसिस बीमारी हो जाती है। जिस लीवर खराब होना à¤à¥€ कह सकते हैं। जिसके अंरà¥à¤¤à¤—त à¤à¤• शराबी का लीवर खराब होता है वैसे ही उसके पेट में बीमारी, उलà¥à¤Ÿà¥€ में खून व शौच के साथ à¤à¥€ खून आ सकता है। ये लकà¥à¤·à¤£ 7 से 10 साल में विकसित होने की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ होती है। लकà¥à¤·à¤£ दिखने पर तà¥à¤°à¤‚त उपचार करवाà¤à¥¤ आमतौर पर मरीजों को घी खाने से मना किया जाता है। नई रिसरà¥à¤š के मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤• मरीज नारà¥à¤®à¤² मातà¥à¤°à¤¾ में घी खा सकता है। कारà¥à¤¡ टेसà¥à¤Ÿ उपचार करवाने के बाद 15 साल तक पोसà¥à¤Ÿà¤¿à¤µ रहता है। सिरà¥à¤« वायरस लोड टेसà¥à¤Ÿ ही असली टेसà¥à¤Ÿ है।
डॉकà¥à¤Ÿà¤° : हेपटाइटिस बीमारी खून से फैलती है। 5 से 7 साल में लीवर खराब हो जाता है। टांगों में दरà¥à¤¦ रहता है, शरीर में थकावट रहती है। बीमारी à¤à¥‹à¤²à¤¾à¤›à¤¾à¤ª डाकà¥à¤Ÿà¤°à¥‹à¤‚ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ à¤à¤• ही सीरीज का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² करने से फैलती है इसके अलावा नाई की दà¥à¤•ान पर फिटकरी का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² करनी से होती है। à¤à¤¸à¥‡ में इन सब से परहेज करें।
डाकà¥à¤Ÿà¤° : नहीं हेपेटाइटिस पानी के कारण नहीं फैलता है। इसका वायरस खून में होता है। जो कि खून से ही फैलता है। बचाव यही है कि नाई की दà¥à¤•ान पर शे¨वग का सामान खà¥à¤¦ लेकर जाà¤à¤‚ और नशा न करें। हेपेटाइटिस बी के बचाव के लिठटीका है जबकि सी के लिठटीका नहीं है।
डाकà¥à¤Ÿà¤° : सिविल असà¥à¤ªà¤¤à¤¾à¤² में हेपेटाइटिस सी का निशà¥à¤¶à¥à¤²à¥à¤• उपचार है। यहां पर उपचार शà¥à¤°à¥‚ हो जाà¤à¤—ा। सिविल असà¥à¤ªà¤¤à¤¾à¤² के कमरा नंबर 209 में रजिसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ करवा सकते हैं। वैसे उपचार पूरा होने के बाद दोबारा लेने की जरूरत नहीं है, अगर वायरस आ रहा है तो सिविल असà¥à¤ªà¤¤à¤¾à¤² में रजिसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ करवाà¤à¤‚ और अपना मोबाइल नंबर दरà¥à¤œ करवाà¤à¤‚।
डाकà¥à¤Ÿà¤° : अगर हेपेटाइटिस सी है और लीवर पर कोई असर नहीं है तो नशे से परहेज करें व देसी दवाई का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² न करें। लीवर खराब हो चà¥à¤•ा है तो नमक चà¥à¤Ÿà¤•ी à¤à¤° और पानी डेढ़ से दो लीटर तक ही लें।
डाकà¥à¤Ÿà¤° : सिविल असà¥à¤ªà¤¤à¤¾à¤² में हेपेटाइटिस सी का उपचार शà¥à¤°à¥‚ है। मरीजों का रजिसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ चल रहा है। करीब 290 मरीजों का उपचार पूरा हो चà¥à¤•ा है, 375 मरीजों का उपचार चल रहा है। 500 मरीज वे¨टग में है। 150 मरीजों की दवाइयां आ चà¥à¤•ी हैं। जलà¥à¤¦ ही उनका उपचार शà¥à¤°à¥‚ हो जाà¤à¤—ा। मरीज उपचार के लिठनीम-हकीमों के पास जा रहे हैं, इस बारे में à¤à¥€ लोगों को जागरूक किया जा रहा है।
डाकà¥à¤Ÿà¤° : सरकार की तरफ से सà¤à¥€ जिलों में उपचार चल रहा है। फतेहाबाद व कैथल में मरीज जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ है, इसलिठयहां पर फोकस जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ है। जैसे ही दवाइयां पहà¥à¤‚च रही हैं मरीजों का उपचार शà¥à¤°à¥‚ किया जा रहा है। तीन महीने का कोरà¥à¤¸ है। फिलहाल अà¤à¥€ दूसरे जिले के मरीज का यहां पर उपचार करने का कोई गाइडलाइन नहीं है। उमà¥à¤®à¥€à¤¦ है अंबाला में à¤à¥€ जलà¥à¤¦ दवाइयां पहà¥à¤‚च जाà¤à¤‚गी।
डाकà¥à¤Ÿà¤° : अगर रजिसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ करवाया गया है तो जलà¥à¤¦ ही नंबर आ जाà¤à¤—ा। 500 मरीज वे¨टग में चल रहे हैं, 150 मरीजों की दवाइयां आ चà¥à¤•ी हैं। उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ फोन करके बà¥à¤²à¤¾à¤¯à¤¾ जा रहा है। उमà¥à¤®à¥€à¤¦ है अगसà¥à¤¤ के पहले सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ में दवाइयों का काफी मातà¥à¤°à¤¾ में सà¥à¤Ÿà¥‰à¤• आ जाà¤à¤—ा। अगसà¥à¤¤ माह के अंत तक सà¤à¥€ मरीजों का उपचार शà¥à¤°à¥‚ हो जाà¤à¤—ा। रजिसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ के बारे में कमरा नंबर 209 में जानकारी ले सकते हैं।
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